उज्जैन के विश्वसनीय पंडित जी हर पूजा का सही समाधान
एस्ट्रोलॉजर पंडित सुनिल गुरुजी उज्जैन धार्मिक अनुष्ठानों में रूचि अपने बाल्यकाल से ही थी, पंडित जी को समस्त प्रकार के अनुष्ठानो का प्रयोगत्मक ज्ञान एवं सम्पूर्ण विधि विधान की जानकारी पंडित जी को गुरुकुल से प्राप्त हुयी है, पंडित जी वैदिक अनुष्ठानों में आचार्य की उपाधि दंडी सेवा आश्रम उज्जैन से मध्यप्रदेश से विभूषित है दिल्ली , जयपुर इंदौर जैसे सेमिनारों में जाकर एस्ट्रोलॉजी अवॉर्ड प्राप्त किया है एवं सभी प्रकार के दोष एवं बाधाओं के निवारण के कार्यो को करते हुए 21 वर्षो से भी ज्यादा हो गया है।
वर्तमान में पंडित जी पूरी उज्जैन नगरी में मंगलनाथ भात पूजन,कालसर्प पूजा के सर्वश्रेष्ठ विद्वानोँ की श्रेणी में अग्रणी है, कालसर्प पूजा के अलावा पंडित जी ने नवग्रह शांति, मंगलशांति पूजा, रुद्राभिषेक, ग्रहण दोष निवारण, चांडाल दोष निवारण, पितृ दोष निवारण, जैसे अनुष्ठानों को सम्पूर्ण वैदिक पद्धति द्वारा संपन्न किया है। इसके अतिरिक्त महामृत्युंजय जाप, दुर्गा सप्तसती पाठ के प्रकांड ज्ञाता एवं विद्वान है, एकबार जिस यजमान के लिए कार्य का संकल्प लेते है उसके सभी कार्य सिद्ध एवं सफल हो जाते है। पंडित जी कुम्भ विवाह, अर्क विवाह, जन्म कुंडली अध्ययन अवं पत्रिका मिलान में भी सिद्धस्त है, इन समस्त कार्यो के साथ साथ पंडित जी वास्तु पूजन, वास्तु दोष निवारण एवं व्यापार व्यवसाय बाधा निवारण का पूजन भी सम्पूर्ण विधि विधान से करते है।
Happy Yajman
Pujan Done
Years Experiance
"कालसर्प योग क्या है ?"
काल सर्प दोष क्या है? कुंडली में कालसर्प दोष कैसे बनता है और इस योग को कालसर्प योग क्यों कहा जाता है? कालसर्प योग, मूलतः संस्कृति के दो शब्दों से मिलकर बना है जिनका अर्थ भिन्न भिन्न कर्मकांडी विद्वानों ने निकाला है, ये दो शब्द है ‘काल’ एवं ‘सर्प’, काल के भी दो अर्थ है, प्रथम मृत्यु और दूसरा है समय, इसी प्रकार से सर्प शब्द के भी दो अर्थ है, प्रथम है सर्प अर्थात नाग और दूसरा है रेंगना, अब हम अगर दोनों शब्दों को संयुक्त करते है तो चार अर्थ निकलते है प्रथम सर्प द्वारा मृत्यु, दूसरा समय पर नाग का प्रकोप, तीसरा बहुत ही दुर्दशा के साथ जीवन जीना, यही समय का रेंगना, और चौथा है मृत्यु का धीरे धीरे व्यक्ति को अपने निकट
बुलाना किन्तु बहुत कष्टों के साथ...
मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को मांगलिक माना जाता है, ऐसा होने पर ऐसे जातक का विवाह भी मांगलिक स्त्री या पुरुष से ही करना चाहिए| इसी प्रकार शनि देव यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो या दृष्टिगत भी हो तो कुंडली में मांगलिक योग का परिहार हो जाता है, सभी मांगलिक कुंडलियो में मांगलिक दोष हो ऐसा जरुरी नहीं होता है, लोग व्यर्थ में मांगलिक योग सुन के भयभीत हो जाते है, जबकि मंगल ग्रह तो शुभ कार्य, भूमि, ऋणहरता एवं फल प्रदान करने वाले देवता है, कुंडली में मंगल जब ख़राब होता है तब इन्सान , कुछ दोगल होजाता है , और यही कारन है की वहा अपने जीवन में अक्सर सफल होता है, एसा इन्सान मोम की तरह पिघल ता रहता है....
महामृत्युंजय मंत्र का जाप क्यों किया जाता है ? शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय जाप करने का विशेष उल्लेख मिलता है। महामृत्युंजय भगवान शिव को खुश करने का मंत्र है। इसके प्रभाव से इंसान मौत के मुंह में जाते-जाते बच जाता है, मरणासन्न रोगी भी महाकाल शिव की अद्भुत कृपा से जीवन पा लेता है। बीमारी, दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों से दूर करने, मौत को टालने और आयु बढ़ाने के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र जाप करने का विधान है।जब व्यक्ति जाप न कर सके, तो मंत्र जाप किसी योग्य पंडित से भी कराया जा सकता है। समुद्र मंथन के बहुप्रचलित आख्यान देवासुर संग्राम के समय शुक्राचार्य ने अपनी यज्ञशाला मे इसी महामृत्युंजय के अनुष्ठानों का उपयोग देवताओं द्वारा मारे गए राक्षसों को जीवित करने के लिए किया था...
नवग्रहों के बारे में कुछ खास बातें: नवग्रहों को हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है. नवग्रहों की चाल और स्थिति से व्यक्ति के जीवन, भाग्य, और कार्यों पर असर पड़ता है. नवग्रहों के बारे में कुछ खास बातें: सूर्य को ग्रहों का मुखिया माना जाता है. चंद्रमा को सोम के नाम से भी जाना जाता है. मंगल को लाल ग्रह या अंगारक भी कहा जाता है. बुध को शांत, सुवक्ता, और हरे रंग में दिखाया जाता है. बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है. .शुक्र को धन, खुशी, और प्रजनन का प्रतीक माना जाता है. शनि को कठिन मार्ग से जुड़े शिक्षण, करियर, और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है. राहु को राक्षसी सांप का मुखिया माना जाता है. केतु को आम तौर पर एक "छाया" ग्रह माना जाता है...